सोशल सिक्योरिटी करार: क्या है और आपको क्यों जानना चाहिए
अगर आप विदेश में काम कर रहे हैं या कभी-कभी विदेश में काम करने का सोचते हैं, तो "सोशल सिक्योरिटी करार" (Social Security Agreement) आपकी जिंदगी बदल सकता है। यह करार दो देशों के बीच होता है ताकि कर्मचारियों की पेंशन, बीमा और सामाजिक सुरक्षा के अधिकार सुरक्षित रह सकें। आसान शब्दों में: आपने किसी देश में योगदान दिया हो तो वह योगदान बर्बाद न हो — इसे जोड़कर फायदा दिलाने के लिए ये समझौते बनाए जाते हैं।
क्या आपने कभी सोचा है कि विदेश में काम करते समय पेंशन कहाँ जाएगी? या क्या आपको दोनों देशों में योगदान देना होगा? सोशल सिक्योरिटी करार इन सवालों के जवाब देता है और अक्सर दोगुना योगदान रोकता है। इससे आपका भविष्य सुरक्षित रहता है और अंतिम समय पर मिलने वाली फायदों की रकम गिनती में आती है।
किसे क्या फायदा?
यह करार खासतौर पर उन लोगों के लिए लाभकारी है जो सीमापार रोजगार, ठेकेदारी या लंबी अवधि के नौकरी परिवर्तन करते हैं। फायदे प्रमुख रूप से तीन तरह के होते हैं: 1) पेंशन और रिटायरमेंट बेनिफिट्स, 2) अस्थायी या स्थायी दिव्यांगता और 3) बेरोज़गारी और परिवारिक लाभ (नियमों के अनुसार)। उदाहरण: अगर भारत और किसी देश के बीच समझौता है तो दोनों देशों में किए गए योगदान को जोड़कर पेंशन निकालने का अधिकार मिल सकता है।
यह ध्यान रखें कि हर करार एक जैसा नहीं होता। कुछ समझौते केवल पेंशन को कवर करते हैं, तो कुछ में स्वास्थ्य या बेरोज़गारी के फायदे भी शामिल होते हैं। इसलिए जिस देश में आप काम कर रहे हैं, वहां के करार की शर्तें पढ़ना जरूरी है।
दावा कैसे करें — कदम दर कदम
1) सबसे पहले यह जाँचें कि भारत का उस देश के साथ सोशल सिक्योरिटी करार है या नहीं। आधिकारिक वेबसाइट (वित्त मंत्रालय/सामाजिक सुरक्षा विभाग) या भारत के दूतावास से जानकारी लें।
2) जरूरी दस्तावेज तैयार रखें: पहचान (पासपोर्ट/आधार), कार्यकाल के प्रमाण (कॉन्ट्रैक्ट/पेरोल), योगदान रसीदें, और संबंधित देश से मिलने वाले प्रमाणपत्र।
3) दोनों देशों के संबंधित दफ्तरों से संपर्क करें — भारत में EPFO या पेंशन अधिकारी और दूसरे देश के सोशल सिक्योरिटी संगठन। अक्सर ऑनलाइन फॉर्म और निर्देश मिल जाते हैं।
4) फॉर्म सही तरीके से भरें और अनुवर्ती (follow-up) रखें। प्रक्रियाओं में समय लग सकता है, इसलिए धैर्य रखें और दोनों पक्षों से मिलने वाले पत्र/सर्टिफिकेट संभाल कर रखें।
टिप: अगर भाषा या कागजी प्रक्रिया मुश्किल लगे तो किसी जानकार या वकील से मदद लें। छोटे कागज़ी भूल भी दावा ठप कर सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल — क्या करार से कर (tax) पर असर पड़ता है? कुछ मामलों में हां: पेंशन पर टैक्स नियम अलग हो सकते हैं। इसीलिए कर सलाहकार से बात कर लें ताकि दोहरे कराधान से बचा जा सके।
अगर आप विदेश जा रहे हैं तो काम शुरू होने से पहले सोशल सिक्योरिटी करार और उससे जुड़े नियमों की जाँच कर लें। यह थोड़ी मेहनत भविष्य में बड़ी राहत दे सकती है।
भारत और यूनाइटेड किंगडम ने ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट और डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन पर दस्तखत किए हैं। इससे दोनों देशों के व्यापार में नया मुकाम आएगा, भारतीय सामानों को UK में ड्यूटी फ्री पहुंच मिलेगी और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दों का समाधान होगा। समझौते से 2040 तक कारोबार $25.5 अरब पहुंचाने का लक्ष्य है।