सीरिल रामाफोसा: कौन हैं और क्यों उनकी खबरें मायने रखती हैं
सीरिल रामाफोसा दक्षिण अफ्रीका के प्रमुख राजनेताओं में से एक हैं। वे एक समय ट्रेड-यूनियन नेता थे, बाद में बड़े कारोबार और राजनीति में आए और 2018 में देश के राष्ट्रपति बने। उनके फैसले न सिर्फ दक्षिण अफ्रीका को प्रभावित करते हैं, बल्कि अफ्रीका और वैश्विक मंच पर भी असर रखते हैं।
उनके राजनीतिक और आर्थिक इश्यू — सरल भाषा में
रामाफोसा की प्राथमिकता अक्सर अर्थव्यवस्था की मजबूती और निवेश को बढ़ाना रही है। बेरोजगारी और बिजली संकट जैसी समस्याओं को हल करने के लिए उन्होंने निवेश और निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित करने की योजना रखी है। साथ ही जमीन सुधार (land reform) और काले धन व भ्रष्टाचार के मामलों पर उनकी नीतियाँ चर्चा में रहती हैं।
आप सोच रहे होंगे — इससे आम आदमी को क्या फर्क पड़ेगा? बिजली, नौकरियाँ और कीमतों के फैसले सीधे लोगों के जीवन पर असर डालते हैं। इसलिए रामाफोसा के कदमों पर नजर रखना जरूरी है, खासकर उन फैसलों पर जो विदेशी निवेश, खनन और कृषि से जुड़े हैं।
विवाद और जवाबदेही
रामाफोसा के कार्यकाल में कुछ विवाद भी आए — भ्रष्टाचार के आरोप और कुछ निजी मामलों की जांचें। ये मुद्दे उनकी सरकार की छवि और जनता के विश्वास को प्रभावित करते हैं। दूसरी तरफ़, उन्होंने संस्थागत सुधार और पारदर्शिता की बातें भी कही हैं। इन विरोधाभासों को समझना जरूरी है ताकि किसी फोटो-फिनिश नज़रिए के बजाय पूरा परिप्रेक्ष्य मिले।
क्या वह अफ्रीका में भू-राजनीति की अहम शख्सियत हैं? हाँ। रामाफोसा ने अफ्रीकी यूनियन, BRICS और ग्लोबल मंचों पर सक्रिय भूमिका निभाई है। भारत समेत कई देशों के साथ आर्थिक और रणनीतिक रिश्ते मजबूत करने के इन कदमों का असर व्यापार, निवेश और अध्यादेशों पर दिखता है।
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सीरिल रामाफोसा ने दूसरे कार्यकाल के लिए दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। मई के चुनावों के बाद यह संभव हुआ, जहां किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। सत्ता के इस बदलाव को रामाफोसा ने 'नई युग की शुरुआत' बताया। उनकी सरकार का गठन 6 दलों के गठबंधन के साथ किया गया है, जिसमें विपक्षी दल डेमोक्रेटिक अलायंस भी शामिल है।