ड्रोन हमला — क्या होता है और किस तरह असर कर सकता है?
ड्रोन हमला का मतलब छोटा या बड़ा उड़ता उपकरण किसी लक्ष्य पर भेजकर नुकसान पहुँचाना है। अब यह केवल युद्धक्षेत्र तक सीमित नहीं रहा — शहरी इलाकों, सीमाओं और महत्वपूर्ण ढांचों पर भी खतरा बढ़ा है। आप ने टीवी या सोशल मीडिया पर ऐसी घटनाएँ देखी होंगी जहाँ निगेटिव इम्पैक्ट सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर तक नहीं, बल्कि नागरिकों की जान तक पहुंचा देता है।
ड्रोन हमले के प्रकार
ड्रोन हमले कई तरह के होते हैं: सशस्त्र ड्रोन जो विस्फोटक या आग्नेयास्त्र ले जाते हैं; निगरानी ड्रोन जो बड़ी घटनाओं की रेकी करते हैं; और स्वचालित 'स्वार्म' हमले जहाँ कई छोटे ड्रोन एक साथ लक्ष्य पर हमला करते हैं। कुछ हमले कम-दूरी वाले रिमोट नियंत्रित ड्रोन से होते हैं, तो कुछ में GPS स्पूफिंग या सिग्नल हस्तक्षेप का इस्तेमाल कर ड्रोन को मार्गदर्शित किया जाता है। जानना जरूरी है कि खतरे का स्वरूप अलग-अलग होता है और उसी के हिसाब से सुरक्षा चाहिए।
सुरक्षा के व्यावहारिक कदम
यदि आप नागरिक हैं तो क्या कर सकते हैं? सबसे पहला काम है आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा रखें और अफवाहों से बचें। घटनास्थल से दूर रहें, और यदि स्थानीय प्रशासन ने कर्फ्यू या evacuation कहा है तो तुरंत पालन करें। बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों में आयोजक से पूछें कि क्या ड्रोन डिटेक्शन या नो-फ्लाई जोन की व्यवस्था है।
सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के लिए टेक्निकल उपाय हैं: रेडियो फ्रीक्वेंसी जामिंग, रडार और इन्फ्रारेड सेंसर से पहचान, नेल-गन या नेट-आधारित सिस्टम से ड्रोन को गिराना, और साइबर उपाय जैसे ड्रोन कंट्रोल सिग्नल हैक करना। इन सबका इस्तेमाल कानूनी सीमा के भीतर और मानव जीवन की सुरक्षा को ध्यान में रखकर होना चाहिए।
नीति और नियम भी उतने ही जरूरी हैं। भारत में DGCA और अन्य एजेंसियाँ ड्रोन रजिस्ट्रेशन, उपयोग मानक और नाइट-फ्लाइंग जैसी शर्तें लागू करती हैं। कंपनियां और लोकल प्रशासन मिलकर एयरस्पेस मैनेजमेंट और इमरजेंसी रिस्पॉन्स तैयार कर रहे हैं। अगर आप ड्रोन के प्रैक्टिशनर हैं तो अपने ड्रोन का पंजीकरण रखें और प्राइवेट क्षेत्रों में उड़ाने से पहले परमिशन लें।
ख़ास बात: सूचना तेजी से फैलती है, इसलिए निजी व्यक्ति, मीडिया और प्रशासन को सतर्क और जिम्मेदार रहना चाहिए। किसी भी ड्रोन से जुड़ी खतरनाक सूचना तुरंत लोकल पुलिस या नागरिक आपात सेवा को बताएं। आप छोटे कदम उठा कर अपने आस-पास की सुरक्षा बढ़ा सकते हैं—जैसे किसी संदिग्ध उपकरण को छूना न, बच्चों को सार्वजनिक आयोजनों से दूर रखना और आधिकारिक निर्देशों का पालन करना।
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