अपर एकादशी: तिथि, महत्त्व और व्रत कैसे रखें
अपर एकादशी के बारे में जानना चाहते हैं लेकिन पृष्ट से शुरुआत कैसे करें? सबसे पहले यह समझ लें कि एकादशी व्रत चंद्रमास के 11वें दिन आता है और तारीख हर साल बदलती है। सही तिथि जानने के लिए अपने स्थानीय पंचांग या विश्वसनीय वेबसाइट देखें।
यह व्रत सामान्यतः भक्ति, मानसिक शांति और पाप निवारण के लिए रखा जाता है। लोग इसे मन और शरीर की शुद्धि का अवसर मानते हैं। पर क्या आपको व्रत रखने से पहले क्या-क्या करना चाहिए, पता है?
अपर एकादशी कब और कैसे देखें
तिथि का निर्धारण चंद्र की स्थिति और स्थानीय सूर्योदय-सूर्यास्त पर निर्भर करता है। अक्सर लोग गलती से ऑनलाइन सामान्य डेट देख लेते हैं — इसलिए तीन आसान कदम अपनाएं:
- स्थानीय पंचांग या मंदिर की घोषणा जांचें।
- अगर मोबाइल ऐप से देख रहे हैं तो लोकेशन ऑन रखें ताकि सही तिथि मिले।
- दोहराना चाहें तो अपने पुजारी या परिवार के बुजुर्ग से कन्फर्म कर लें।
इनसे आप गलत दिन व्रत रखने या छोड़ने की भूल से बच जाएंगे।
व्रत की आसान और व्यावहारिक विधि
अगर आप पहली बार अपर एकादशी रख रहे हैं तो सरल तरीके से शुरू करें। सुबह स्नान के बाद साफ कपड़े पहनें। भगवान का नाम जपें या छोटा पाठ करें—जैसे विष्णु का कोई संक्षिप्त मंत्र।
खानपान में नियम सरल रखें: पूर्ण उपवास रखने वाले सुबह से अगली सुबह तक जल ही लेते हैं। लेकिन अगर आप उपवास हल्का रखना चाहते हैं तो फल, दूध या בस या अनाज छोड़कर साबुत अन्न से हल्का उपवास रखें।
कुछ उपयोगी नियम जिन्हें अपनाएं:
- शरीर रोगी हो या गर्भवती हों तो डॉक्टर से सलाह लें—स्वास्थ्य पहले।
- रात में जागकर पूजा करें या भजन सुनें ताकि मन शांत रहे।
- अहिंसा, सत्य बोलना और चिड़चिड़ाहट से बचना व्रत का हिस्सा है।
व्रत के बाद ब्रेक-फास्ट में धीरे-धीरे हल्का भोजन लें—दही, फल या खिचड़ी अच्छा रहता है।
अंत में एक छोटा सा चेकलिस्ट याद रखें: पंचांग कन्फर्म करें, स्वास्थ्य पर ध्यान दें, पूजा-संकल्प संक्षेप में रखें और व्रत के दौरान संयम बनाए रखें।
अगर आप और जानकारी चाहते हैं—जैसे इस साल अपर एकादशी की तारीख, स्थानीय समय पर पूजा विधि या सरल भजन—तो अपने इलाके का पंचांग या हमारी साइट के त्योहार सेक्शन पर देख सकते हैं। ऐसे छोटे कदम व्रत को सरल और असरदार बनाते हैं।
अपर एकादशी, एक महत्वपूर्ण हिंदू उपवास, 2 जून 2024 को मनाया जाएगा। यह ज्येष्ठ महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को पड़ता है। इस वर्ष यह सर्वार्थ सिद्धि योग, आयुष्मान योग और सौभाग्य योग जैसे शुभ योगों के अंतर्गत मनाया जाएगा। पूजा का शुभ समय 2 जून को प्रातः 05:04 बजे से 3 जून को प्रातः 02:41 बजे तक है। व्रत पारणा 3 जून को प्रातः 08:05 से 08:10 बजे के बीच होगी।