युद्ध अपराध — क्या हैं और क्यों जानना जरूरी है
युद्ध अपराध वे गम्भीर अपराध होते हैं जो सशस्त्र संघर्ष के दौरान अंजाम दिए जाते हैं। आमतौर पर इनमें नागरिकों पर जानबूझकर हमला, अप्राकृतिक उत्पीड़न, यातना, बंधकों का दुरुपयोग और संरक्षित निशानों पर हमला शामिल होते हैं। ये सिर्फ कानूनी शब्द नहीं हैं — इनका असर अचानक लोगों की जिंदगियों और समुदायों पर पड़ता है।
क्या माना जाता है युद्ध अपराध?
सरल भाषा में, अगर कोई नियम जानकर तोड़ा गया हो तो उसे युद्ध अपराध माना जा सकता है। उदाहरण के लिए: अस्पताल या स्कूल को निशाना बनाना, बच्चों को लडाकू बनाना, नागरिकों का सामूहिक निर्वासन और पकड़कर प्रताड़ित करना। ऐसे मामलों की परिभाषा Geneva Conventions और Rome Statute जैसे अंतरराष्ट्रीय दस्तावेज़ों में दी गई है।
अंतरराष्ट्रीय फोरम जैसे ICC (International Criminal Court) गंभीर आरोपों की जांच करते हैं। देश भी अपने घरेलू कानूनों के तहत जांच और मुक़दमा चला सकते हैं। मतलब ये कि जवाबदेही केवल एक जगह पर निर्भर नहीं रहती — कई रास्ते खुले रहते हैं।
कैसे पहचानें और खबरों में क्या ध्यान रखें
खबर पढ़ते समय ये आसान चेक करें: तस्वीरें और वीडियो का स्रोत क्या है? किसी आधिकारिक सूत्र ने पुष्टि की है या केवल सोसल मीडिया पर वायरल है? घटना की तारीख, जगह और पीड़ितों से जुड़ी विवरण स्पष्ट हैं या नहीं? झूठी सूचनाओं को फैलने से रोकने के लिए इन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
अगर आप सीधा गवाह हैं या किसी घटना की विश्वसनीय सूचना पाते हैं, तो स्थानीय मानवाधिकार संस्थाओं या मान्यता प्राप्त अनुदानित संगठनों को रिपोर्ट कर सकते हैं। अनंत समाचार पर हम ऐसे मामलों की रिपोर्टिंग में स्रोत-सत्यापन और प्रभावितों की आवाज़ दिखाने की कोशिश करते हैं।
याद रखें, युद्ध अपराधों की खबरें संवेदनशील होती हैं। पीड़ितों की गोपनीयता और सुरक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए। फोटो या वीडियो साझा करने से पहले क्षति या पहचान उजागर न हो, यह जाँचना जरूरी है।
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अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) गाजा संघर्ष के दौरान कथित युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए हमास के नेताओं यहया सिनवार, मोहम्मद डीफ और इस्माइल हनीया के साथ-साथ इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और रक्षा मंत्री योव गैलेंट के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट मांग रहा है।