शिक्षा प्रणाली: असल में क्या बदलना जरूरी है?

क्या आपको लगता है स्कूल सिर्फ परीक्षा पास कराने की मशीन बन गए हैं? आज की शिक्षा प्रणाली में कई बच्चे ज्ञान तो सीख लेते हैं, पर समझ नहीं पाते कि वो ज्ञान असल जिंदगी में कैसे काम आएगा। यही वजह है कि नौकरी और स्किल की मांग के बीच बड़ी खाई दिखती है।

यहां मैं सीधे-सीधे बताऊँगा कि सिस्टम की प्रमुख कमजोरियाँ क्या हैं, क्या सुधार आ रहे हैं और आप—एक छात्र या माता-पिता—तुरंत क्या कर सकते हैं।

क्या सही नहीं चल रहा — मुख्य चुनौतियाँ

सबसे बड़ा मुद्दा है रटने पर जोर। बच्चे बार-बार याद करते हैं लेकिन कॉन्सेप्ट समझते नहीं। दूसरी बड़ी समस्या है असमान संसाधन: शहरों के अच्छे स्कूलों और गांवों के सरकारी स्कूलों में खाई तेज है।

अध्यापन के तरीके भी पुरानी पद्धति पर टिके हुए हैं—लेक्चर, नोट्स और परीक्षा। टीचर्स को नए तरीके सिखाने की ट्रेनिंग कम होती है। परीक्षा प्रणाली भी अक्सर रचनात्मकता को नहीं मापती; सिर्फ सही-गलत और अंक पर जोर रहता है।

डिजिटल डिवाइड ने हाल के सालों में सब बताया है—ऑनलाइन क्लासेस में जो बच्चा इंटरनेट नहीं पकड़ पाता, वो पीछे रह जाता है। और जो शिक्षा नीति बनी, उसका असर जमीन पर धीरे-धीरे दिखता है, तुरंत नहीं।

अभी क्यों उम्मीद है और आप क्या कर सकते हैं

NEP 2020 जैसे बदलाव अच्छे संकेत देते हैं—मल्टीडिसिप्लिनरी कॉलेज, स्किल-आधारित कोर्स और परीक्षा सुधार पर जोर। पर असल बदलाव तब आएगा जब स्कूल और घर दोनों व्यवहार बदलें।

छात्रों के लिए आसान कदम: पढ़ाई को प्रोजेक्ट बनाइये—किसी टॉपिक पर छोटी रिपोर्ट, प्रैक्टिकल प्रयोग या वीडियो बनाइए। इससे रटने की जगह समझ आती है। समय-प्रबंधन पर काम करें: रोज़ छोटे सत्र में पढ़ें, रातभर नहीं। ऑनलाइन मुफ्त कोर्स और यूट्यूब ट्यूटोरियल का फायदा उठाइए पर प्रमाणिक स्रोत चुनें।

अभिभावकों के लिए: बच्चों से रिजल्ट से ज्यादा समझ के सवाल पूछें—"तुमने यह कैसे सीखा?" जैसे। स्कूल से नियमित संपर्क रखें और टीचर्स को सहयोग दें। अगर संभव हो तो बच्चों को एक्स्ट्रा-करिकुलर एक्टिविटी में शामिल कराएं—ड्रामा, कोडिंग, स्पोर्ट्स।

शिक्षक और संस्थान भी छोटे बदलाव कर सकते हैं: क्लास में डिस्कशन बढ़ाएँ, प्रोजेक्ट-आधारित असेसमेंट दें और डिजिटल संसाधन को सब तक पहुँचाने के आसान रास्ते अपनाएँ। स्थानीय स्तर पर ट्रेनिंग वर्कशॉप्स से काफी फर्क पड़ सकता है।

अगर आप नीति में दिलचस्पी रखते हैं तो अपने स्थानीय स्कूल बोर्ड या पंचायत में भाग लें—छोटे बदलाव जैसे बुकिंग लाइब्रेरी, ट्रेनिंग सत्र, या पैरेंट-टीचर मीट्स से असर दिखता है।

शिक्षा प्रणाली बड़े बदलाव से नहीं, रोज़ाना के छोटे-छोटे सुधार से बेहतर बनती है। अगर हर घर और हर स्कूल थोड़ा सीधा प्रयास करें, तो अगली पीढ़ी के लिए सीखना ज्यादा उपयोगी और मज़ेदार बन सकता है।

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राष्ट्रीय शिक्षा दिवस 2024: थीम, महत्व और गतिविधियाँ

राष्ट्रीय शिक्षा दिवस 2024: थीम, महत्व और गतिविधियाँ
12 नवंबर 2024 Anand Prabhu

राष्ट्रीय शिक्षा दिवस 11 नवंबर को भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती के रूप में मनाया जाता है। यह दिन उनके भारतीय शिक्षा प्रणाली में अतुलनीय योगदान को याद करने और समावेशी, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में बढ़ने का आह्वान करता है। 2024 की थीम समावेशी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर केंद्रित है, जो विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से विचारशीलता, रचनात्मकता और भावनात्मक बुद्धिमत्ता को बढ़ावा देती है।