शरद पूर्णिमा — क्या, कब और क्यों मनाते हैं?

शरद पूर्णिमा चंद्र मास की पूर्णिमा को आता है, जब चाँद पूरी तरह निकलता है और रात लंबे समय तक रोशन रहती है। माना जाता है कि इस रात चाँद की किरणों में विशेष ऊर्जा होती है। कई परिवार इसे खेती-हाल, स्वास्थ्य और देवी-देवताओं की कृपा के लिए मनाते हैं।

तिथि हर साल बदलती है, इसलिए कैलेंडर या पंडित से सही समय ज़रूर जाँचें। आमतौर पर यह अक्टूबर-नवंबर के आसपास आता है और तिथि-पत्रिका पर आधारित होकर पूजा का समय तय होता है।

शरद पूर्णिमा के प्रमुख रीति-रिवाज

लोग रात को चाँद की रोशनी में भीगे हुए पेड़-पौधे और घर के सामने रखा हुआ खीर आदि प्रसाद निकालकर चंदनी में रखते हैं। कुछ समुदायों में सप्तपदी की तरह पौधे व अनाज चाँद की रोशनी में रखा जाता है ताकि फसल अच्छी हो।

भोजन की बात करें तो खास तरीके से बनी खीर, दूध से जुड़ी मिठाइयाँ और हल्का उपवास इस दिन प्रचलित है। कई लोग संध्या के बाद चाँद देखने निकलते हैं और गीत-भजन करते हैं।

याद रखें: जो चीज़ें बाहर रखी जाएँ (जैसे खीर या दूध), उन्हें रात भर खुले में न रखें — कीट और धूल से बचाने के लिए ढक कर थोड़ी देर चाँद में रखना ही ठीक रहता है।

आसान पूजा-विधि और घर पर करने की टिप्स

सुबह हल्का स्नान करें और सफाई से पूजा स्थान तैयार करें। शाम को घी का दीपक जलाएँ, हल्का पुष्प अर्पित करें और चाँद निकलते ही खीर या दूध चाँद की रोशनी में रख दें। कुछ लोग शंख फूंकते हैं या श्लोक पढ़ते हैं — आप अपनी सुविधा के हिसाब से सरल मंत्र या भजन चुन सकते हैं।

अगर परिवार में बच्चे हैं तो उन्हें भी छोटा-सा हिस्सा दें ताकि त्यौहार का अनुभव रहे। पूजा के बाद प्रसाद को परिवार में बाँटें और जरूरतमंद को भी दे दें।

खीर की आसान रेसिपी: 1 लीटर दूध, 1/2 कप चावल, चीनी स्वादानुसार, किशमिश और बादाम। दूध और चावल को धीमी आंच पर गाढ़ा होने तक पकाएँ। चीनी डालकर मिलाएँ। ठंडा करके छाँदनी में थोड़ी देर रखें और बादाम-किशमिश से सजाएँ।

स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर ध्यान रखें: रात में बाहर खाना खुला न रखें; अगर बच्चे और बुज़ुर्ग हों तो ठंड से बचाव करें; ड्राइविंग/आउटडोर गतिविधि में सूर्यास्त के बाद सुरक्षा का ध्यान रखें।

अंत में, शरद पूर्णिमा मनाने का मुख्य उद्देश्य है शांति, कृतज्ञता और प्रकृति के साथ जुड़ना। छोटी-छोटी तैयारियाँ और ध्यान से आप इस रात को सुकून भरा और यादगार बना सकते हैं।

अगर आप स्थानीय रीति-रिवाज या खास व्यंजन जानना चाहते हैं तो बताइए — मैं वह जानकारी दे दूँगा।

शरद पूर्णिमा 2024: जानें तिथि, समय, पूजा विधि और इस शुभ त्यौहार का महत्व

शरद पूर्णिमा 2024: जानें तिथि, समय, पूजा विधि और इस शुभ त्यौहार का महत्व
16 अक्तूबर 2024 Anand Prabhu

शरद पूर्णिमा हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण त्योहार है जिसे आश्विन मास की पूर्णिमा की रात को मनाया जाता है। इस वर्ष, यह 16 अक्टूबर 2024 को है। इस दिन को चंद्रमा और देवी लक्ष्मी की पूजा के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस रात को चंद्रमा की किरणों के विशेष औषधीय गुण होते हैं। इसे कोजागरा व्रत के रूप में भी जाना जाता है, जिसमें लोग स्वास्थ्य, समृद्धि और सुख की कामना से व्रत रखते हैं।