पूर्णिमा तिथि: कब आती है और क्या करें

पूर्णिमा वह रात होती है जब चंद्रमा पूरी तरह दिखता है। घर पर पूजा करना हो, व्रत रखना हो या किसी विशेष आयोजन की योजना बनानी हो — पहले यह जानना ज़रूरी है कि पूर्णिमा तिथि कब है और वह किस समय तक मान्य रहेगी। हर महीने की पूर्णिमा का समय स्थानीय पंचांग और समयानुसार बदलता है, इसलिए अपना स्थान ध्यान में रखें।

पूर्णिमा की तारीख कैसे देखें?

सबसे सरल तरीका है स्थानीय पंचांग या भरोसेमंद कैलेंडर ऐप देखना। पंचांग में तिथि, चंद्रमा के उदय-ास्त, और तिथि समाप्ति का समय दिया होता है। कभी-कभी पूर्णिमा रात में शुरू होती है और अगले दिन सुबह तक चलती है — ऐसे में आप पंचांग के 'तिथि समाप्ति' देख कर तय करें कि व्रत किस समय तक करें। अगर मौके पर शंका हो तो अपने मंदिर या पुजारी से संपर्क कर लीजिए।

ऑनलाइन टाइमज़ोन के कारण तारीखें अलग दिख सकती हैं, इसलिए वही स्रोत अपनाएँ जो आपकी ज़ोन के अनुसार सेट हो।

पूजा और व्रत के आसान नियम

व्रत रखने से पहले हल्का उपवास रखें और रात को चन्द्रोदय से पहले स्नान कर लें। पूजा के लिए साफ कपड़े पहनें, दीपक, दही-फल, मिठाई और साफ जल रखें। चंद्रमा को पानी, पुष्प और रोली अर्पित करते हैं। कई लोग पूर्णिमा पर दान देते हैं — भोजन, कपड़े या दान के रूप में।

व्रत के समय ध्यान रखें: अगर पूर्णिमा की तिथि आधी रात के बाद खत्म हो रही हो तो व्रत उस समय तक ही मान्य होगा। बहुसंख्यक रीति में चन्द्रदर्शन के बाद ही व्रत तोड़ना ठीक समझा जाता है। बच्चों, बुजुर्गों या बीमार लोगों के लिए उपवास में नियम नरम रखें — वे मात्र फलाहार कर सकते हैं।

कौन-कौन से उत्सव पूर्णिमा पर आते हैं? बुद्ध पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा, गुरु पूर्णिमा, और शरद पूर्णिमा जैसे त्योहार अक्सर पूर्णिमा तिथि पर ही आते हैं। इन दिनों मंदिरों में विशेष आराधना और दान का आयोजन होता है।

पूर्णिमा केवल धार्मिक अवसर नहीं है — यह ध्यान और योग के लिए भी अच्छा समय माना जाता है। चंद्रमा की रोशनी में ध्यान लगाने से मन शांत होता है और नींद भी बेहतर आती है। वैज्ञानिक रूप से चंद्रमा के चरणों का मनोविज्ञान पर असर देखा गया है, इसलिए आत्म-देखभाल के छोटे-छोटे नियम अपनाएं: पर्याप्त नींद, हल्का खाना और सुबह का ताज़ा पानी।

टिप्स जिन्हें आप आज़मा सकते हैं: पंचांग से समय पहले देख लें, व्रत में तेज़ शारीरिक श्रम न करें, पूजा के बाद घर के मुख्य द्वार पर थोड़ा जल चढ़ा दें और जरूरतमंद को दान दें।

अगर आपको स्थानीय पूर्णिमा तारीख चाहिए तो अपने शहर का पंचांग देखें या हमारी वेबसाइट पर उपलब्ध कैलेंडर चेक करें। यहाँ आपको हर महीने की प्रमुख तिथियाँ और उनसे जुड़ी खबरें भी मिलेंगी।

शरद पूर्णिमा 2024: जानें तिथि, समय, पूजा विधि और इस शुभ त्यौहार का महत्व

शरद पूर्णिमा 2024: जानें तिथि, समय, पूजा विधि और इस शुभ त्यौहार का महत्व
16 अक्तूबर 2024 Anand Prabhu

शरद पूर्णिमा हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण त्योहार है जिसे आश्विन मास की पूर्णिमा की रात को मनाया जाता है। इस वर्ष, यह 16 अक्टूबर 2024 को है। इस दिन को चंद्रमा और देवी लक्ष्मी की पूजा के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस रात को चंद्रमा की किरणों के विशेष औषधीय गुण होते हैं। इसे कोजागरा व्रत के रूप में भी जाना जाता है, जिसमें लोग स्वास्थ्य, समृद्धि और सुख की कामना से व्रत रखते हैं।