नफरती भाषण: पहचान, जोखिम और रिपोर्ट कैसे करें
सोशल मीडिया पर कभी-कभी ऐसे पोस्ट और वीडियो दिखते हैं जो किसी समुदाय, जाति या व्यक्ति के खिलाफ नफरत फैलाते हैं। ये न केवल भावनाओं को चोट पहुंचाते हैं बल्कि सामुदायिक शांति और कानून दोनों के लिए खतरनाक होते हैं। अगर आप अक्सर ऐसी सामग्री देखते हैं, तो समझें कि इसे कैसे पहचानें और क्या करना चाहिए।
नफरती भाषण की पहचान कैसे करें
अगर कोई पोस्ट किसी समूह को सीधे अपमानित कर रहा है, हिंसा के लिए उकसा रहा है, झूठ फैलाकर द्वेष बढ़ा रहा है या किसी की मानवता घटा रहा है — उसे नफरती भाषण माना जा सकता है। संकेतों पर ध्यान दें: सामान्य भाषा से आगे जाकर धमकी, सांप्रदायिक अपील, तर्कहीन दंड की माँग या किसी समूह को अपराधी ठहराना। ऐसे पैटर्न अक्सर तेज़ गुस्से और असत्य तथ्यों के साथ आते हैं।
पहचानते समय याद रखें: भावनात्मक भाषा ही हमेशा नफरती नहीं होती। पर अगर संदेश का मकसद 'नुकसान पहुंचाना' या 'भेदभाव बढ़ाना' है, तो गंभीर माना जाए।
अगर आपने नफरती सामग्री देखी तो क्या करें
सबसे पहले उसे आगे न बढ़ाएँ। शेयर करने से समस्या और बढ़ती है। स्क्रीनशॉट लें, पोस्ट का लिंक सेव करें और उस पेज का नाम नोट कर लें। यही सबूत आगे रिपोर्ट में काम आएगा।
फिर प्लेटफ़ॉर्म पर रिपोर्ट बटन का इस्तेमाल करें — फेसबुक, ट्विटर/X, यूट्यूब और इंस्टाग्राम के पास हेट स्पीच रिपोर्टिंग के साधन होते हैं। अगर मामला गंभीर है या हिंसा का आह्वान करता है तो स्थानीय पुलिस या साइबर सेल से संपर्क करें। भारत में आप National Cyber Crime Portal (cybercrime.gov.in) पर भी शिकायत कर सकते हैं।
कानूनी संदर्भ जानना जरूरी है। ऑनलाइन नफरती भाषण पर गैरकानूनी कार्रवाई के लिए इंडियन पीनल कोड की धाराएँ जैसे 153A (द्वेष फैलाना), 295A (धार्मिक भावनाओं को ठेस), 505 (जनहित को भड़काना) लागू हो सकती हैं। साथ ही साइबर शिकायतों के लिए संबंधित विभाग कार्रवाई करते हैं।
मीडिया और आम लोगों की भूमिका बड़ी है। किसी भी सनसनीखेज क्लिप को बिना फैक्ट-चेक किए शेयर न करें। खबर पढ़ते समय स्रोत देखें, आधिकारिक बयान ढूंढें और संदिग्ध जानकारी को क्रॉस-चेक करें।
यहाँ कुछ हाल की कहानियाँ जो नफरती भाषण या गलत सूचना से जुड़ी हैं: "जम्मू-कश्मीर पंचायत चुनाव पर फर्जी सूचना वायरल" (प्रशासन ने सफाई दी), "जावेद अख्तर का वीडियो" (वायरल क्लिप पर बहस) और "Supreme Court ने ANI-विकिपीडिया विवाद में HC आदेश पलटा" (मीडिया कंटेंट पर कानूनी सवाल)। इनके बारे में पढ़कर आप समझ पाएंगे कि मामला कैसे आगे बढ़ता है।
अगर आप शख्सियत या छोटी संस्था के प्रति हुई नफरत का शिकार हैं, तो अपनी सुरक्षा पहले रखें। जांच-पड़ताल के लिए भरोसेमंद कानूनी सलाह लें और छेड़छाड़ या धमकियों की सूचना तुरंत दें।
आखिर में, नफरती भाषण को रोकना सबकी जिम्मेदारी है — प्लेटफ़ॉर्म, मीडिया और हम उपयोगकर्ताओं की। संयम और सही रिपोर्टिंग से आप बड़ा फर्क ला सकते हैं।
बीजेपी विधायक नितेश राणे द्वारा दिए गए नफरती भाषण के कारण महाराष्ट्र में साम्प्रदायिक हिंसा भड़कने की आशंका जताई जा रही है। एआईएमआईएम ने बीजेपी पर चुनावी फायदों के लिए साम्प्रदायिक तनाव बढ़ाने का आरोप लगाया है। पुलिस ने राणे के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है और मामले की जांच कर रही है।