मौलाना अबुल कलाम आजाद: जीवन, विचार और शिक्षा पर उनका योगदान

क्या आप जानते हैं कि किसने स्वतंत्र भारत में शिक्षा को सबसे पहली बार सिस्टमेटिक रूप से आकार दिया? यही सवाल अक्सर आता है और जवाब है — मौलाना अबुल कलाम आजाद। वे सिर्फ एक राजनेता नहीं थे; वे विचारक, लेखक और शिक्षा के हिमायती थे।

मौलाना अबुल कलाम आजाद का जन्म 11 नवंबर 1888 को हुआ और 22 फरवरी 1958 में उनका निधन हुआ। वे अंग्रेज़ शासन के खिलाफ आज़ादी के संघर्ष में प्रमुख चेहरे रहे। उन्होंने हिन्दू‑मुस्लिम एकता की बात जोर देकर कही और विभाजन के खिलाफ रहे। 1942 के 'क्विट इंडिया' आंदोलन के समय ब्रिटिश सरकार ने उन्हें गिरफ्तार किया और कई साल जेल में बिताने पड़े।

राजनीति से लेकर शिक्षा तक — क्या खास किया उन्होंने?

राजनीति में उनके योगदान के साथ-साथ शिक्षा क्षेत्र में उनका काम आज भी नजर आता है। स्वतंत्रता के बाद वे भारत के पहले शिक्षा मंत्री बने और विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और प्राथमिक शिक्षा पर काम किया। उन्होंने विज्ञान, तकनीक और उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए नीतियों पर जोर दिया। आज जो यूनिवर्सिटी ग्रांट्स, रिसर्च फंडिंग और आधुनिक संस्थान हैं, उनकी जड़ में उस समय की सोच दिखती है।

मौलाना का जुड़ाव Jamia Millia Islamia जैसे संस्थानों से रहा। वे हिंदी‑उर्दू के सामंजस्य वाले रूप 'हिंदुस्तानी' के प्रचारक थे और भाषा के जरिए लोगों को जोड़ने पर विश्वास रखते थे। उनका लेखन और पत्रों का संग्रह — खासकर जेल से लिखे गए पत्र — आज भी पढ़ने लायक हैं।

इनसे क्या सीखें और कहाँ से शुरुआत करें?

अगर आप मौलाना के बारे में जल्दी से जानना चाहते हैं तो उनके लेख और जेल के दौरान लिखी गई रचनाएँ पढ़ें। 'Ghubar‑e‑Khatir' जैसी रचनाएँ इंसान, समाज और शिक्षा पर सीधे सवाल उठाती हैं। आप Jamia Millia Islamia की वेबसाइट या राष्ट्रीय पुस्तकालयों में उनकी रचनाएँ खोज सकते हैं।

क्या आप इतिहास पढ़ते‑देखते हैं या शिक्षा नीति में रुचि रखते हैं? मौलाना की सोच आपको आधुनिक विवादों में भी नया नजरिया दे सकती है — खासकर जब बात साम्प्रदायिकता और शिक्षा की हो। आप लोकल लाइब्रेरी जाएँ, उनकी जीवनी पढ़ें, या किसी डॉक्युमेंटरी से शुरुआत करें।

अंत में, मौलाना अबुल कलाम आजाद की अहमियत तभी समझ आती है जब हम आज की शिक्षा‑नितियों और समाजिक मेलजोल को उनके नजरिये से परखते हैं। उनकी बातें सीधे, व्यावहारिक और अभी भी प्रासंगिक हैं। अगर आप उनकी विचारधारा को समझना चाहते हैं तो छोटे‑छोटे लेख पढ़ें, उनके भाषण सुनें और संस्थानों की विकास यात्रा पर ध्यान दें।

राष्ट्रीय शिक्षा दिवस 2024: थीम, महत्व और गतिविधियाँ

राष्ट्रीय शिक्षा दिवस 2024: थीम, महत्व और गतिविधियाँ
12 नवंबर 2024 Anand Prabhu

राष्ट्रीय शिक्षा दिवस 11 नवंबर को भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती के रूप में मनाया जाता है। यह दिन उनके भारतीय शिक्षा प्रणाली में अतुलनीय योगदान को याद करने और समावेशी, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में बढ़ने का आह्वान करता है। 2024 की थीम समावेशी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर केंद्रित है, जो विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से विचारशीलता, रचनात्मकता और भावनात्मक बुद्धिमत्ता को बढ़ावा देती है।