बच्चों की सुरक्षा: रोज़मर्रा के आसान कदम
क्या आप जानते हैं कि छोटी-छोटी सावधानियाँ बच्चों की जान और आत्मविश्वास दोनों बचा सकती हैं? बच्चे तेज़ी से सीखते हैं, लेकिन खतरे भी उतनी ही तेज़ी से बनते हैं। यहां practical और सीधी सलाह दी जा रही है जिसे आप आज ही लागू कर सकते हैं।
घर पर सुरक्षा के सीधे नियम
घर सबसे सुरक्षित जगह होनी चाहिए, पर छोटी-छोटी चीज़ें खतरनाक बन सकती हैं। बिजली के सॉकेट पर कवर लगाएं और तेज सिरों वाली चीज़ें बच्चों की पहुँच से दूर रखें। रसोई में गर्म सामान बच्चों से अलग रखें और किचन की दरवाज़े पर लॉक या मॉनिटर रखें।
फर्नीचर और टीवी को दीवार से ठीक से बांधें ताकि गिरने का खतरा न रहे। सीढ़ियों पर गेट लगाएं और खिड़कियों में ग्रिल या लॉक रखें। रसोई व बाथरूम के क्लीनिंग सॉल्वेंट बच्चे की पहुँच से बाहर रखें — प्लास्टिक की बोतलों पर हमेशा स्पष्ट लेबल लगाएं।
खेलने के इलाके को साफ रखें। छोटे खिलौनों में धारदार हिस्से न हों और बैटरी वाले खिलौने की बैटरियाँ अच्छी तरह सील रहें। खाने-पीने में नमक, मसालों और दवाइयों को अलग से रखें—गलत खाने से जान लेने वाले हादसे होते हैं।
ऑनलाइन, स्कूल और बाहर की सुरक्षा — सरल व्यवहार
ऑनलाइन सुरक्षा में पासवर्ड, प्राइवेसी और ऐप्स का चुनाव अहम है। बच्चों के डिवाइस पर parental controls सेट करें, प्राइवेसी सेटिंग्स समझें और किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करने की सलाह दें। सोशल मीडिया पर पूरा नाम, एड्रेस या स्कूल जैसी जानकारी साझा न करने के लिए कहें।
बाहर जाते समय बच्चों को स्टैंडर्ड नियम बताएं: अजनबियों के साथ कार में न बैठना, बिना आपकी अनुमति कहीं नहीं जाना, और अगर कोई परेशान करे तो तुरंत चिल्लाकर ध्यान खींचना। स्कूल से आने-जाने के रूट तय करें और छोटे बच्चों के लिए भरोसेमंद कैब या परिचित को ही चुनें।
सार्वजनिक जगहों पर बच्चों को पहचान पट्टिका दें — नाम, माता-पिता का नंबर और किसी नज़दीकी रिश्तेदार का नंबर। फोन न होने पर भी बच्चे किसी दुकान या काउंटरपर जाकर मदद माँग सकें देखिए, और उन्हें बेसिक निर्देश जैसे अपना पूरा नाम और घर का पता बोलना सिखाएं।
पहली मदद की बेसिक जानकारी हर माता-पिता के पास होनी चाहिए। घाव पर कैसे पट्टी लगानी है, बलगम फंसने पर क्या करना है और अगर बच्चे को अचानक साँस फूलना या चक्कर आये तो किन नंबरों पर कॉल करना है — ये बातें याद रखें। CPR और बेसिक फर्स्ट-एड का कोर्स कर लें, ये समय आने पर बहुत काम आते हैं।
बच्चों से बात करना सबसे बड़ा सुरक्षा कदम है। डर या शर्म के बिना वे आपसे बात कर सकें—यह नियम बनाइए। उनकी छोटी-छोटी शिकायतों को हल्के में न लें; अक्सर छोटी बातें बड़े खतरे का संकेत होती हैं।
इन सरल नियमों को रोज़मर्रा की आदत बना लें। सुरक्षा की तैयारी सिर्फ सामान बदलने से नहीं होती, बल्कि बच्चों को समझाने और रोज़ अभ्यास करने से मजबूत बनती है। अगर आप चाहें तो आज ही एक छोटा सुरक्षा-चेकलिस्ट बना लें और घर पर एक सुरक्षा-रिहर्सल कर के देखें।
विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर, न्यू सेंदेन्यू गाँव में राज्य तंबाकू नियंत्रण सेल और राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम द्वारा एक आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बच्चों को तंबाकू उद्योग के हस्तक्षेप से बचाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। Dr. Meribeni Odyuo और Dr. Arenla Walling ने तंबाकू मुक्त गाँव और स्कूलों की घोषणा की।