पश्चिम बंगाल चुनाव हिंसा: सुवेंदु सरकार और हुमायूँ कबीर पर हमला

पश्चिम बंगाल चुनाव हिंसा: सुवेंदु सरकार और हुमायूँ कबीर पर हमला
24 अप्रैल 2026 Anand Prabhu

लोकतंत्र के सबसे बड़े उत्सव में खून और हंगामे का तड़का लग गया। 23 अप्रैल 2026 को पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान के दौरान राज्य के कई हिस्सों में भीषण हिंसा भड़की। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जहाँ एक तरफ सुरक्षा बलों की भारी तैनाती थी, वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक उम्मीदवारों को सरेआम भीड़ द्वारा पीटा गया और गाड़ियों को निशाना बनाया गया। यह सिर्फ चुनावी मुकाबला नहीं, बल्कि सड़कों पर वर्चस्व की जंग जैसा नजर आया, जिसने राज्य के चुनावी माहौल को तनावपूर्ण बना दिया है।

दरअसल, हिंसा की शुरुआत मतदान से एक रात पहले ही हो गई थी। मुर्शिदाबाद के नाओडा इलाके में एक देसी बम धमाका हुआ, जिसमें कई लोग घायल हुए। यह एक स्पष्ट संकेत था कि माहौल पहले से ही बारूद की तरह था। हालांकि भारतीय चुनाव आयोग ने सख्त इंतजाम किए थे और केंद्रीय सुरक्षा बलों को तैनात किया था, लेकिन फिर भी उपद्रवियों ने कानून की धज्जियां उड़ा दीं।

कुमारगंज में पुलिस की मौजूदगी में सुवेंदु सरकार पर हमला

दक्षिण दिनाजपुर के कुमारगंज निर्वाचन क्षेत्र से मामला बेहद गंभीर है। यहाँ सुवेंदु सरकार, उम्मीदवार of भारतीय जनता पार्टी (BJP) को तृणमूल कांग्रेस (TMC) समर्थकों की भीड़ ने घेर लिया। खबर यह है कि सुवेंदु सरकार को बूथ नंबर 24 पर 'बूथ जैमिंग' (मतदान रोकने) की जानकारी मिली थी। जब वे अपनी टीम के साथ जांच करने पहुंचे, तो वहां पहले से मौजूद भीड़ ने उन पर लाठियों और घूंसों से हमला कर दिया।

हैरानी की बात यह है कि इस पूरी घटना का वीडियो सामने आया है, जिसमें साफ दिख रहा है कि पुलिस वहीं मौजूद थी, लेकिन हमलावरों पर लगाम नहीं लगी। इस हमले में सुवेंदु सरकार गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। भाजपा नेताओं का सीधा आरोप है कि पुलिस की नाक के नीचे टीएमसी के गुंडों ने इस वारदात को अंजाम दिया। वहीं सुवेंदु सरकार ने बाद में कहा कि टीएमसी इस जिले में चुनाव हार चुकी है, इसलिए वे हताशा में इस तरह की हिंसा कर रहे हैं।

मुर्शिदाबाद में हुमायूँ कबीर के काफिले पर पथराव

हिंसा का दूसरा बड़ा केंद्र मुर्शिदाबाद जिला रहा। यहाँ आम जनता उन्नयन परिषद (AJPP) के प्रमुख और रेसनगर निर्वाचन क्षेत्र के उम्मीदवार हुमायूँ कबीर को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया गया। नाओडा इलाके में AJPP और TMC कार्यकर्ताओं के बीच पहले ही हिंसक झड़पें हो चुकी थीं।

तनाव तब और बढ़ गया जब हुमायूँ कबीर एक पोलिंग बूथ देखने सिबनगर गांव पहुंचे। वहां टीएमसी कार्यकर्ताओं ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया और उनके काफिले पर पत्थरों और ईंटों से हमला बोल दिया। इस हमले में कई गाड़ियां बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। इस बीच, हुमायूँ कबीर की पुलिस अधिकारियों के साथ भी तीखी बहस हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस की मदद से टीएमसी कार्यकर्ता मतदाताओं को डरा रहे हैं और उन्हें धमकी दी जा रही है कि यदि उन्होंने टीएमसी को वोट नहीं दिया, तो अंजाम बुरा होगा। इस घटना के बाद कबीर ने मौके पर ही धरना दिया और उच्च स्तरीय जांच की मांग की।

अन्य इलाकों में दहशत और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

केवल बड़े नेता ही नहीं, बल्कि जमीनी कार्यकर्ता भी इस हिंसा की चपेट में रहे। बीरभूम जिले के लाभपुर निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के पोलिंग एजेंट देबाशीष ओझा को अज्ञात हमलावरों ने बुरी तरह पीटा, जिससे उनके सिर में गंभीर चोटें आईं। राज्य के कई अन्य मतदान केंद्रों पर भी धक्का-मुक्की और गाली-गलौज की खबरें आईं, जहाँ कुछ उम्मीदवारों को तो मतदान केंद्र से खदेड़ दिया गया।

इस पूरी स्थिति पर स्मृति ईरानी, भाजपा नेता, ने सोशल मीडिया के जरिए तीखा प्रहार किया। उन्होंने इस हमले को टीएमसी की 'बेशर्मी' और 'कानूनविहीनता' करार दिया। उन्होंने कहा कि दिनदहाड़े एक उम्मीदवार को घेरना यह दर्शाता है कि टीएमसी लोकतंत्र की आत्मा को कुचलने की कोशिश कर रही है।

दूसरी ओर, टीएमसी उम्मीदवार शहीना मुमताज खान ने इन घटनाओं को 'अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण' बताया, हालांकि उनकी पार्टी ने मतदाताओं को डराने-धमकाने के आरोपों से साफ इनकार किया है।

चुनाव आयोग का एक्शन और भविष्य की चुनौती

चुनाव आयोग का एक्शन और भविष्य की चुनौती

वीडियो सबूतों के आधार पर चुनाव आयोग ने अब कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने कुमारगंज वीडियो में दिख रहे सभी हमलावरों की तत्काल गिरफ्तारी के आदेश दिए हैं और संबंधित अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

यह चुनाव रिकॉर्ड तोड़ मतदान के लिए जाना जा रहा था, लेकिन इन हिंसक घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 23 अप्रैल 2026 की तारीख यह बताने के लिए काफी है कि सुरक्षा बलों की तैनाती के बावजूद राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता किस हद तक गिर सकती है। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि क्या आयोग आने वाले चरणों में हिंसा रोकने के लिए कोई नया और प्रभावी तरीका अपनाएगा या फिर यही पैटर्न जारी रहेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

सुवेंदु सरकार पर हमला कहाँ और कैसे हुआ?

यह हमला दक्षिण दिनाजपुर के कुमारगंज निर्वाचन क्षेत्र के बूथ नंबर 24 के पास हुआ। सुवेंदु सरकार जब बूथ जैमिंग की जांच करने पहुंचे, तो टीएमसी समर्थकों ने उन पर लाठियों और घूंसों से हमला किया। यह पूरी घटना पुलिस की मौजूदगी में हुई और वीडियो में कैद हो गई।

हुमायूँ कबीर ने पुलिस पर क्या आरोप लगाए?

AJPP प्रमुख हुमायूँ कबीर ने आरोप लगाया कि टीएमसी कार्यकर्ता पुलिस की मदद से मतदाताओं को डरा-धमका रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके काफिले पर सिबनगर में पथराव हुआ और पुलिस ने उन्हें रोकने के बजाय टीएमसी समर्थकों को शह दी।

चुनाव आयोग ने इस हिंसा पर क्या कार्रवाई की है?

चुनाव आयोग ने कुमारगंज में हुए हमले के वीडियो के आधार पर उसमें दिख रहे सभी संदिग्धों की तत्काल गिरफ्तारी का आदेश दिया है। साथ ही, राज्य प्रशासन से इन घटनाओं की विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है ताकि जवाबदेही तय की जा सके।

क्या मतदान से पहले भी हिंसा हुई थी?

हाँ, मतदान से एक रात पहले मुर्शिदाबाद के नाओडा इलाके में एक देसी बम धमाका हुआ था। इस घटना ने संकेत दिया था कि मतदान के दिन तनाव बढ़ सकता है, और अंततः यह व्यापक हिंसा में बदल गया।